सीरिया का राष्ट्रपति बना HTS कमांडर अबू जुलानी, संसद भंग, इस्लामिक गुटों को कर पाएगा कंट्रोल?

दमिश्क
हयात तहरीर अल-शाम (HTS) के नेता अबू मोहम्मद अल-जुलानी, जिसे अहमद अल-शरा भी कहा जाता है, उसने खुद को सीरिया का नया राष्ट्रपति घोषित कर लिया है। उसने कहा है, कि जब तक देश नई सरकार के चयन के लिए तैयार नहीं हो जाता, तब तक वो सीरिया का कमान अपने हाथों में रखेगा। अहमद अल-शरा के नेतृत्व में ही HTS ने बशर अल-असद की सत्ता को उखाड़ फेंका था और राजधानी पर कब्जा कर लिया था। अहमद अल-शरा दिसंबर से ही सीरिया की सत्ता को संभाल रहा है और बुधवार को विद्रोही गुटों के बीच हुई बैठक के बाद अहमद अल-शरा को देश का अंतरिम राष्ट्रपति घोषित किया गया।

अहमद अल-शरा को राष्ट्रपति घोषित करने के अलावा, देश की सेना के प्रवक्ता ने देश की संसद को भी भंग करने का ऐलान किया है। वहीं, एक विधान परिषद के गठन की बात की गई है और देश में 2012 में जिस संविधान को लागू किया गया था, उसे भी रद्द कर दिया गया है। इसके अलावा, सीरिया की सेना को भंग कर दिया गया है और उसकी जगह पर नई सुरक्षा संस्था और नई सेना को शामिल किया गया है। सैन्य प्रवक्ता ने ये भी घोषणा की है, कि सीरिया में तमाम गुटों को खत्म कर दिया जाएगा और उन गुटों में शामिल लड़ाकों को देश की नई सेना में शामिल कर लिया जाएगा।

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क्या देश में जल्द चुनाव करवा पाएगा अहमद अल-शरा?
हालांकि, अगर घोषणा पर अमल होता है, तो सशस्त्र गुटों को भंग करने के फैसले से एचटीएस का भी सेना में विघटन हो जाएगा, लेकिन अभी तक साफ नहीं किया गया है, कि सेना में किन किन गुटों को शामिल किया जाएगा, जिसने लोगों को हैरान कर दिया गया है। अहमद अल शरा ने सीरिया पर कब्जा करने के बाद कहा था, कि उसका मकसद देश में शांति की स्थापना करना है और देश में नागरिक संस्थाओं को निर्माण करना है, लेकिन क्या वो अपने ही संगठन को भंग करेगा, ये एक बड़ा सवाल है।

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नई घोषणा के मुताबिक, मार्च तक सीरिया में नई सरकार का चुनाव होगा और जो भी जीतेगा, अहमद अल शरा को उसे सत्ता सौंपनी होगी। पिछले महीने अल अरबिया चैनल से बात करते हुए अहमद अल शरा ने कसम खाई थी, कि उसका काम संघर्ष में बर्बाद हो चुके देश का फिर से निर्माण करना है, और देश में चुनाव करवाने में चार सालों का समय लग सकता है। इसके अलावा, उसने कहा था, कि नये संविधान के निर्माण में भी 3 सालों का वक्त लग सकता है। ऐसे में सवाल ये हैं, कि क्या वो मार्च महीने तक चुनाव करवाएगा और क्या नई सरकार के हाथ में सत्ता सौंपेगा?

विद्रोही गुटों को एक कर पाएगा अहमद अल शरा?
अहमद अल शरा की अगली चुनौती देश के तमाम विद्रोही गुटों को एक साथ लाने की होगी। सीरियाई रक्षा मंत्रालय ने इसी महीने घोषणा की थी, कि वो तमाम विरोधी गुटों से बातचीत शुरू करेगा और एक आम सहमति बनाने की कोशिश करेगा, कि तमाम विद्रोही गुट एक साथ कैसे काम कर सकते हैं। द गार्जियन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अहमद अल शरा ने अपने रक्षा मंत्री के साथ मिलकर करीब करीब हर दिन अलग अलग विद्रोही गुटों के साथ बातचीत की है और उन गुटों के नेताओं को सरकार में महत्वपूर्ण पद दिए हैं।

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लेकिन, देश में चरमपंथी इस्लामिक संगठनों को कंट्रोल करना उसके लिए आसान नहीं होगा। कई ऐसे संगटन हैं, जिन्हें अलग अलग देशों से शह मिलता है। वहीं, कई इस्लामिक गुट ऐसे हैं, जिन्हें तुर्की का समर्थन हासिल है और ज्यादा उम्मीद यही है, कि वो अंतरिम सरकार के फैसलों को नहीं मानेंगे। इस बीच, सीरिया में दखल देने वाली विदेशी ताकतें भी जायजा ले रही हैं, कि क्या सीरिया में शांति स्थापित हो पाएगी?

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